कहानी बनेब हम सऊँसे सदी के

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रउरा देखीं हमरा नेकी बदी के।

कहानी बनेब हम सऊँसे सदी के।

बान्ह तूरे सगरो पनिया के धारा

कहाँ केहू रोकेला कवनो नदी के।

हियरा उजर रउरा चूना से राखीं

रँगवा बदल जाई पीयर हरदी के।

हम मेहनत से मुँहवाँ मोड़िले नाहीं

बनत रही शान रउरा राजगदी के।

जिनगी के जोगे जतन कइले रुपया

समय के फेरा भइल गठरी रदी के।

पिरितिया क पेड़वा सूखी ना कबहूँ

बाचल रही जहियाले सबर हदी के।

——- केशव मोहन पाण्डेय ——-

28/12/2016

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