घृणा

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एक बेर के बात हS कि हम आनंद विहार स्टेशन से रेलगाड़ी पकड़ के छपरा अवत रहनी। टिकस रिजर्वेशन रहे पर ईहे लगभग 450 के आसपास वेटिंग  रहे। अब राउरे  लोग तS समझिये गइल होखम कि 450 वेटिंग के बाद हमरा बइठे के कहाँ जगह मिलल होई। पहिला बेर अइसन भीड़ रिजर्वेशन बोगी मे हम देखले रहनी। टिकट कंफ्रम वाला लोग के जब पेशाब लागे तS ओ लोग के सोचे के पड़े कि कवना शौचालय मे जाई जवना मे आदमी ना बैठल होखे। खाएँ पिये के समान बेचे वाला तS जब एक बार राउंड मारे तS पक्का तीन-चार आदमी से झगरा क के जाए, केहु चिल्लाए के हमार पैर कुचल देलस, त केहु चिल्लाए आन्हर बारे , देखा त नइखे। गजबे मंजर रहे रेलगाड़ी के।

जब रेलगाड़ी कानपुर स्टेशन पहुँचल तS बोगी मे के लोग, बोगी के दरवजा बन्द करे लागल लो ताकि ई स्टेशन से अब कोई ई बोगी मे मत चढ़े ना तS अब शौचालय मे भी बैठल लोग के कठिन हो जाई। लेकिन अईसे – जईसे कके कसहु लोग कही ना कही जगह बनाइये लेहलस। ओहिमे कहि से दुनु आँख के सुर एक हाथ मे लाठी और एक हाथ मे एगो छोठ मोटरी लेले एने- ओने बैठे के कोशिश करत रहले। लोग ऊ आन्हर  आदमी के अपना लगे से दुरदुरा देत रहे। काहे कि ऊ आन्हर  आदमी के दुनु आँख ना होखे के कारण और ना नहीला धोआईला के कारण शरीर आ कपड़ा सब बदबु देत रहे। जहाँ  भी ऊ आन्हर आदमी बैठे के चाहे उहाँ  के लोग नाक आ मुँह पर हाथ रख के कहे कि इहाँ  जगह नइखे आगे  जा, आगे जा। तीन चार बोगी लाठी से ठेगत ठेगत थाक गइल रहे ऊ आन्हर आदमी घुमघाम के ओही जगह प ऊ आइल। हमरा से कुछ दूरी प आके उ खाड़ा भइल। ओकर ई हालत देख के हम भगवान के कोसत रहनी। आज हम रेल गाड़ी के अन्दर असली मानवता देखनी कि जेकर आखँ, कान, नाक बा ऊहे आदमी शायद सबसे ज्यादा एह  धरती पर  कपटी बा आ सबसे ज्यादा घिरना करेला। ऊ आन्हर आदमी के अंदर अब बल ना रहे कि ऊ आगे जाके बईठे खातिर जगह ढ़ुढ़े। पुरा थाक गईल रहे। हाफत रहे। हम अब पैर पसार के बईठल रनी पैर खिंच लेनी आ बोलनी- बाबा ईहा बईठ जाई। ई बात सुन के उ बुढ़ा आन्हर आदमी आके हमरा आगे बईठ गईले। हमरा बगल वाला बइठल आदमी हमरा के घूर के देखत रहे। हम उ आदमी के कुछ प्रतिक्रिया ना देनी।

ऊ आन्हर आदमी के दु चार बात सुन के करेजा वाला आदमी के करेजा कुछ सेकेंड खातिर रुक जाई ऊ आन्हर बुढ़ लाचार के दुःख आ दरद सुन के।

आन्हर आदमी  एह  धरती पर  केहु माई के लाल पैदा नइखे जे आन्हर के मदद करे। लोग के तS भगवान आँख नाक कान सब अंग देले बारे शायद एही खातिर कि कवनों लाचार, आन्हर – भेभर , अपंग आदमी से घृणा करे ? जब ई बात सत्य बा तS भगवान हमार आँख ना देके सही कइले बारे ताकि हम भेदभाव आ घृणा आपन आँख से ना देखी ले। साथ-साथ भगवान हमारा के दिमाग ना देले रहतन तS अच्छा रहत ताकि हम ई घृणा आउर  भेदभाव ना महसूस करती। जवन कि ई महसूस कइला से हमारा आत्मा के चोट पहुँचे ला ।

  • जियाउल हक

फायर सेफ्टी इंजीनीयर

मोo- 7362022633

ग्राम + पो- जैतपुर,  थाना दाउदपुर,

जिला- सारण (बिहार)

पिन कोड – 841205

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