चना जोर गरम

guru

चना जोर गरम, बाबू ,

तू लेल चना जोर गरम !

हमार चना बनल अलबेला,

खइलन भिरगू बाबा क चेला !

जिनका नाँव प ददरी मेला ,

गंगा घाट प रेलम- पेला !!

देख सजल दुकनियाँ ठेला,

जहवाँ बिकत जलेबी केला !

भइल लइकन के झमेला ,

जेब मे नइखे एगो धेला !! चना जोर गरम

हमार चना बनल बा ऊल,

देख इ हावड़ा के पुल !

बगल मे खुलल बा इस्कुल,

लइका खेल में गइले भुल !!

देहिया पोतले माटी धूल,

मास्टर मार दिहले दू रुल !

पिठिया हो गइले गुल-गुल,

धइके रोवे ले इस्टूल s !! चना जोर गरम

हमार चना बनल बा ओटा,

पतोहिया नइहर से अइली छोटा !

भातवाँ खा के भइली उ मोटा,

झरलि लाहंगा उ जरी-गोटा !!

आँगना खोली के बइठे झोटा,

बुढीया देख-देख घघोटा !

पतोहिया मारे चला के लोटा

बुढीया फेके नाक से पोटा !! चना जोर गरम !!

 

  • गुरू विन्द्रा सिंह”गुरू”

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