परम_पूज्य_वो_नारी_है….

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सारी शक्ति जिसमें समाहित

परम पूज्य वो नारी है

सब कुछ उसके आंचल में है

वो ऐसी अधिकारी है ।

 

बने कभी सावित्रि सीता

कभी बने वो लक्ष्मीबाई,

लिए खजाना ममता का

प्रेम सुधा है वो बरसाई,

हर युग में अपमानित होती

ये कैसी लाचारी है ।

 

हुई प्रेमिका राधा तो

एक अमिट इतिहास लिखा

पत्थर की जब बनी अहिल्या

नारी का संत्रास लिखा,

मर्यादा कि रक्षा खातिर

अपनों से वो हारी है ।

 

त्यागी है बलिदानी है

सबसे बड़ी वो दानी है,

लिया समय जब भी करवट

उसने भी रण ठानी है ,

कोमलता को लिए ह्रदय में

वो तलवार दुधारी है ।

 

सारी शक्ति जिसमें समाहित

परम पूज्य वो नारी है ।।

  •         रत्नेश चंचल

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