मैंने पुरुषोत्तम राम दिया

yogi

8 मार्च विश्व महिला दिवस पर एक रचना…………!

श्रृंगारों का झाँसा देकर,
पैरों में पायल बाँध दिया
जिसको मैंने जना उसी ने
मुझको अबला नाम दिया।

अपनों खातिर सती हुई मैं
जौहर सा बलिदान दिया
बन पाषाण कभी मैनें ही
अपना जीवन दान दिया।

अग्नि परीक्षा से मैं गुजरी
पर अपनों का साथ दिया
बिगड़ी हुई लकीरों आगे
मैंने अपना माथ दिया।

रखकर मुझको चौसर पर
इतिहास नें कैसा मान दिया
वस्तु बनाकर मुझको ही
मेरा सबनें दान दिया।

खूब जिया मैंने हर युग को
जैसा जो अंजाम दिया
फिर भी “योगी” कौशल्या बन,
मैंने पुरुषोत्तम राम दिया।।

 

“योगी”

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