मोल

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यह एक परिवार की कथा हैं। वर्मा जी जिनकी मृत्यु हो चुकी है। वर्मा जी की धर्मपत्नी देवकी देवी अपने एकलौते बेटे रवि का लालन – पालन अच्छा से करने के लिए क्या-क्या ना की। यहाँ तक कि जब रवि अपनी पढ़ाई बारहवीं से आगे करने को सोचा तो उसकी माँ ने पुरा-पुरा साथ दि। पहले केवल सिलाई करके ही घर और रवि की पढ़ाई की जिम्मा उठाती थी। अब रवि के पढ़ाई के लिए ज्यादा पैसा की जरुरत बढ़ी तो वह रात को सिलाई करती और दिन मे धनी-मनी सेठो के घर की खाना बनाती। रवि के पढ़ाई के लिए उसकी माँ बहुत कठिन परिश्रम करती। अपने घर का भी काम करना और सेठो के घर भी काम करने जाना, शाम मे वापस आकर सिलाई करना, आराम नाम का कोई चीज नही था। रात मे चार घंटा सो लेती बहुत था। रवि भी अपनी जिम्मेदारी बहुत ही बखुबी से निभाता। काॅलेज के पढ़ाई के बाद छोटे बच्चो को ट्युसन पाढ़ाता। लेकिन कहते है ना कि मेहनत का फल मिठा होता है। वह दिन एक दिन वापस आ गया। रवि और उसकी माँ का दिन बदल गया। रवि किसी अच्छी कम्पनी मे नौकरी  करने लग, अच्छी तनख्वाह मिल रही थीं। सब घर परिवार अच्छे से चलने लगा। कुछ दिन बाद रवि की शादी हो गयी। रवि कि पत्नी शुरू मे तो रवि की माँ के साथ अच्छा व्यवहार करती थी, पर कुछ समय ढ़लने पर सब कुछ बदल गया। रवि की कम्पनी ने शहर मे ही रहने के लिए एक अच्छा सा फ्लैट दिया। रवि माँ और पत्नी के साथ शहर मे ही सिफ्ट हो गया। कुछ  दिन बाद रवि के एक बेटा हुआ। जिसका नाम मोनु रखा गया। देवकी देवी की उम्र अब बुढ़ापे मे ठलने लगी। रवि का बेटा भी अब 8 साल का हो चुका था। दादी और पोते मे अटुट प्रेम था, पर अब रवि के माँ और पत्नी के बीच कुछ खट्टास पैदा हो गया था। आए दिन थोड़े थोड़े बात पर झगड़ा हो उठता। रवि समझा बुझाकर सब चला रहा था। एक दिन की बात है कि रवि अपने कम्पनी के बोस के घर शादी मे शामिल होने जा रहा था, साथ मे अपनी पत्नी और बच्चे को भी लेकर जा रहा था। माँ बेचारी घर पर रहेगी। रवि के बेटा बोला- दादी दादी तुम नही चलोगी। रवि की माँ- नही बेटा, दुसरे के घर सब लोग चले जाएँगे तो अपना घर कौन देखेगा।

रवि बाहर लगी गाड़ी मे बैठा और ड्राईवर हरण बजाया। जल्दी जल्दी रवि की पत्नी अपनी साड़ी की पल्लु सम्भालती हुई एक हाथ अपनी बेटे के पकड़े गाड़ी मे आकर बैठी। रवि का बेटा मोनु बहुत ही बोलतु बच्चा था। हर समय कुछ ना कुछ सवाल जबाब करता रहता था।

ईस बार जो मोनु ने अपने माँ बाप से सवाल किया सब को झकझोर दिया। मोनु- मम्मी मम्मी दादी क्यो ना साथ मे आई।  रवि की पत्नी- अगर सब लोग घर से चले जाएँगे तो घर की रखवाली कौन करेगा बेटा, और जल्दी जल्दी पार्टी से भागना परेगा। तुम्हारी दादी घर पर देख रेख करेगी तो हमलोग आराम से पार्टी अटेन कर के कल सुबह वापस आएगे। हमलोग तो पार्टी से कल सुबह वापस आएगे। यह कह कर मोनु की माँ मोनु को पेट मे गुदगुदाई, मोनु हँसने लगा। मोनु हँसते हँसते मे बोला- मम्मी मै भी बाड़ा हो कर जब किसी पार्टी मे जाउगा तो आपको और पापा दोनो आदमी को अपनी घर कि रखवाली के लिए रखुगा ताकि हम आराम से पार्टी अटेन कर सकु। यह बात सुन कर रवि और रवि की पत्नी एक दुसरे के तरफ देखने लगे। गाड़ी के ड्राईवर भी एक बार सर मोड़ कर उस बच्चे के तरफ देख कर आगे की तरफ घुम गया। ड्राईवर ने भी इस बात पर एक व्यंग्य कसते नजर आया- ऐसे मत करना बेटा क्यो की पत्ते की मोल तभी तक होती है जब तक पेड़ के डहनीयो से लगा रहता हैं।

  •                    जियाउल हक।

जैतपुर सारण।

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