राखी के परवान

राखी1

बहिना के बा मन उमगाइल, राखी के परवान

भइया नेहिया से अनजान ॥

 

खोरी – खोरी बाटे डेराइल

निनियो के बा चैन हेराइल

 

गाँव शहर सुनसान बज़रिआ, सत्ता के अभिमान

भइया नेहिया से अनजान ॥

 

बहिना के खोईंछा बा खाली

रखिहा हमरे मुँहवा के लाली

 

अन धन ना रूपिया चाही , दीहा नेह सनमान

भइया नेहिया से अनजान ॥

 

सगुन दिनवा राह निहारेली

नेह क डोर हथवे बान्हेली

 

हहरि असीसिहें नइहरवा, रोजही साँझ बिहान

भइया नेहिया से अनजान ॥

 

दुधही नहाया, पूतहीं फरिहा

बहिना क थाती नेह सरिहरिहा

 

तहरी किरती के सूरज क, ना होखे अवसान

भइया नेहिया से अनजान ॥

 

 

  • जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

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