सब मन भावन है बसंत में

sk chaturvedi

सब कुछ पावन है, बसंत में,
सब मन-भावन है बसंत में।

खिले फूल, पेंड़ो पर, मंज़र,
चले मस्त, बौराए, मधुकर,
सरसों की,क्यारी, इठलाती,
फैले खुशबू, दिग-दिगंत में,
सब मन-भावन है बसंत में।

पुरवा, आग लगाये, तन में,
मोर-पपीहा हरसे वन में,
वाणी में, मिसरी सी, घोले,
कोयल कूके ,मधुर कंठ में,
सब मन-भावन है बसंत में।

सखी,सलेहर, प्रीतम ,प्रियवर,
हर्षित-खुश,प्रफुल्लित,मिलकर,
रंग,अबीर ,गुलाल, उड़ाकर,
बिखरा देते राह -पंथ में,
सब मन-भावन है बसंत में।ल

दूर से आता भक्तों का दल,
करने शिव-अर्पित,गंगा-जल,
भांग-धतुरा, विल्व -पत्र दे,
सहज-जोड़-लेता,अनंत, में,
सब मन-भावन है बसंत में।

  •  संजय कुमार चतुर्वेदी

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