सरस्वती वंदना

saraswati

लिहले  हिय सागर

भरिह  ज्ञान गागर

माई   गुन आगर

नमन वीणा वादिनी || हो मइया !  सादर नमन ……

नरियर फूल अक्षत

चन्नन  मूल रक्षत

उहाँ  बसत सत्सत

सदजन हिय हुलासिनी || हो मइया !  सादर नमन ……

सिर  नवायीं चरण

करs अज्ञान छरण

बीपत  करs हरण

सरस मन निवासिनी || हो मइया !  सादर नमन ……

विनय से होत जय

मिट जाई कुल भय

होखिहें  बिपत छय

मनुज दरद विनासिनी || हो मइया !  सादर नमन ……

ब्रम्ह  दुलारी  माई

मन  अंजोर  लाई

आपन  मन  भाई

कमल नयन विराजिनी || हो मइया !  सादर नमन ……

 

  • जयशंकर प्रसाद द्विवेदी

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