भोजपुरी के लिये विशाल धरना प्रदर्शन

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भोजपुरी जन जागरण अभियान के राष्ट्रीय संयोजक राजेश भोजपुरिया ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि अंतरराष्ट्रीय मातृभाषा दिवस यानि 21 फरवरी 2017 दिन मंगलवार को दिल्ली के जंतर मंतर पर विशाल समूह के साथ छठवाँ धरना प्रदर्शन का आयोजन किया गया है। सरकार हर संसद सत्र के पहले भोजपुरी भाषा भाषियों को भोजपुरी के आठवीं अनुसूची में शामिल करने के आश्वासन का लॉलीपाप दिखा कर पीछे हट जा रही है।आखिर कब तक ठगे जाएंगे भोजपुरिया?, कब तक उपेक्षित रहेगी हमारी भोजपुरी भाषा?संविधान में कब आयेगा प्रस्ताव? 1) भोजपुरी को…

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कहानी बनेब हम सऊँसे सदी के

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रउरा देखीं हमरा नेकी बदी के। कहानी बनेब हम सऊँसे सदी के। बान्ह तूरे सगरो पनिया के धारा कहाँ केहू रोकेला कवनो नदी के। हियरा उजर रउरा चूना से राखीं रँगवा बदल जाई पीयर हरदी के। हम मेहनत से मुँहवाँ मोड़िले नाहीं बनत रही शान रउरा राजगदी के। जिनगी के जोगे जतन कइले रुपया समय के फेरा भइल गठरी रदी के। पिरितिया क पेड़वा सूखी ना कबहूँ बाचल रही जहियाले सबर हदी के। ——- केशव मोहन पाण्डेय ——- 28/12/2016

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तुम्हें क्यूँ शर्म……..!

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ख़ुदा नें जब हमें तुमको तराशा एक गहनें में तुम्हें क्यूँ शर्म ना आई हमें काफ़ीर कहनें में। झुकाते शीश हम अपना ख़ुदा के हर ठिकानें में कभी काशी औ काबा में कभी मथुरा मदीने में। हम ढूढते माधव को तेरे भी अंजानो में तुम्हें तकलीफ़ है कैसी हमारे राम गानों में। कहाँ जन्नत तुम्हारी है धरा से दूर जानें में लगे हो आशियाँ अपना जहन्नुम क्यूँ बनाने में। गुलिस्ता था बड़ा शौक़ीन बदला क्यूँ विरानें में कहाँ से आ गई नफ़रत मनुज के इस घरानें में। सुलगते क्यूँ हो…

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