साधु बाबा आउर शर्मा जी

djp

एक बेर एगो शहर मे एगो लमहर सिद्ध साधु अपने 2-3 चेलन के संगे पहुंचलन । उनुकर चेला लोग चारो ओरी घूम घूम के उनुका बारे मे परचार करे लगलन । धीरे धीरे सभके पता चलल कि साधु बाबा ढेर जानकार मनई बाड़ें । उनुका जीभ पर सुरसती माई वास करेलिन । हाथ देख के जेकरा उ जवन बतावत बाटें , कुल्ह ठीक होत बा । ई बात ओहिजा रहे वाला शर्मा जी के मालूम भइल । एक दिन सबेरहीं शर्मा जी नहा धो के साधु बाबा के लग्गे पहुंचलन…

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पूस के रात

guru

थर-थर कापत हाड़,पूस के रतिया ! जीव-जन्तु बेहाल, छपलस विपत्तिया !!   कोंदो के पुअरा प, लेवा बिछवना बोरसि में करसि, चिपरी जरवना किंकुर-किंकुर क,सभ काटत रतिया !!   लइका-जवान बुढ,घर में पटाइल चिरइ-चुरुंगसभ, खोतवां लुकाइल !! ठाढवा हेरवले ह,सभकर मतिया !!   छुपले सुरुज जाइ,कवना नगरिया ! परत कुहेसा घोर,दिनवों अन्हरिया !! अइसन भइल ”गुरू” पूस के रतिया !!   गुरुबिंद्रा सिंह “गुरु”

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पियSकड़वा यार

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हमार गाँव के तीन यार रले। सुखन मियाँ,  रुबिन मियाँ , साधु पासवान। तीनो मे बहुत दोस्ती रहे। तीनो एके साथ ईटा पाथे चेमनी पर जा सन और एके साथे ईटा पाथ के चेमनी के पथेरी से वापस आवसन। अगर कवनों दोस्त के ईटा पाथे मे देरी हो जाए तS तीनो एक दुसरा के मदद कके जल्दी जल्दी एके साथे ईटा पाथ के चट्टी पर पहुँचत रले सन। जब तीनो यार चट्टी से वापस पैदल आवसन तS केहु माई के लाल ना रहे जे ऐ ई तीनो से बतीया लेव।…

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