वैलेंटाइन डे

vinod Pandey

जब वैलेंटाइन आता है, दिल बाग-बाग हो जाता है, सूने वीराने पतझड़ में, जैसे बसंत छा जाता है, रिमझिम सी घटा बरसती है, इस माघ-पूस के सावन में, मन किशन-कन्हैया हो जाए, दीवानों के वृंदावन में. करते हैं याद सभी वो दिन जब साथ घूमने जाते थे, हिलते-डुलते उन झूलों में, वो भी पूरे हिल जाते थे, पर पास में कोई रहता था तब, झूठी हिम्मत शो करते, अंदर से दिल घबराता था, बाहर से हो-हो करते. कुछ ऐसे वीर अभी भी है, जो याद संजोए रहते है, गत साल मिला जो…

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स्वतन्त्रता

kalpna-bhat

स्वतंत्रता ! पढ़कर सबसे पहले अपने देश की स्वतंत्रता ज़हन में आई । जो भी कुछ व्यक्त कर रहीं हूँ , ये मेरा निजी मत है कृपया अन्यथा न लीजियेगा । स्वतंत्रता को मैं अलग अलग दृष्टिकोण से देखती हूँ – 1 व्यक्तिगत 2 पारिवारिक 3 सामाजिक 4 देश 5 सर्व व्यापी हम मानव सामाजिक प्राणी है । एक एक व्यक्ति समाज का अभिन्न अंग है । मुझे लगता है स्वतंत्रता की परिभाषा हर व्यक्ति के लिये अलग होगी । जो एक व्यक्ति के लिये सही होगा हो सकता है…

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वसंत अइले नियरा

K M Pandey

हरसेला हहरत हियरा हो रामा, वसंत अइले नियरा।। मन में मदन, तन ले ला अंगड़ाई, अलसी के फूल देख आलस पराई, पीपर-पात लागल तेज सरसे, अमवा मोजरीया से मकरंद बरसे, पिहू-पिहू गावेला पपीहरा हो रामा, वसंत अइले नियरा।। मटरा के छिमिया के बढ़ल रखवारी, गेहूँआ के पाँव भइल बलीया से भारी, नखरा नजर आवे नजरी के कोर में, मन करे हमहूँ बन्हाई प्रेम-डोर में, जोहेला जोगिनीया जियरा हो रामा, वसंत अइले नियरा।। पिया से पिरितिया के रीतिया निभाएब, कवनो बिपत आयी तबो मुस्कुराएब, पोरे-पोर रंग लेब नेहिया के रंग में,…

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“कहीं का ईंट कहीं का रोड़ा , भानुमती का कुनबा जोड़ा “

djp

का ज़माना आ गयो भाया, तुम्मा फेरी फिर शुरू हो गयी । अंदर – बाहर , आने – जाने का चिर – परिचित खेल अपने शबाब पर है । जिसे देखो वही धकियाने मे जुट गया है । हर जगह फोटो खिंचवाने की होड़ मची हुई है । कइयों के तो जिह्वा से नम्रता टपकने लगी है , जो गुर्राते थे , मिमियाने लगे हैं । आखिरकार असली मालिक से सामना जो होना है । मालिक तो मालिक ही होता है , उसके सामने तो अच्छे अच्छों की घिघ्घी बंध…

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यज्ञ – आहुति की चिर परंपरा का उद्घोष

djp

का जमाना आ गयो भाया , लोकतंत्रीय युद्धघोष आखिर हो ही गया । चीं चीं चूँ चूँ से तंग आकर बिचारे रेफरी को उद्घोष करना ही पड़ गया । और कर भी क्या सकता था बेचारा , परिपाटी और परंपरा का पालन तो लोकतन्त्र मे करना ही पड़ता है ।अब अलग अलग अखाड़ों मे पहलवानों का जमघट बढ़ चुका है , हर एक को पास चाहिए । बाहें चढ़ाने से लेकर फेटा कसते हुये अपने अपने अंदाज मे ताल जो ठोकनी है । साथ ही साथ सभी को उत्तर प्रदेश…

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समाजवाद की नूरा कुश्ती

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का ज़माना आ गयो भाया, समाजवादियों की नूरा कुश्ती ने तो कार्टून चैनलों के टी आर पी की वाट लगा दी . वैसे भी वर्ष के प्रथम माह में कार्टून चैनल देखने वालो विदेश यात्रा पर चले जाते हैं , वो भी बिना किसी पूर्व सूचना के . बेचारे चैनल वाले , उनकी स्थिति तो सांप छछुंदर वाली हो जाती है . बचे – खुचे उस राशि वाले नूरा कुश्ती देखने में मस्त हैं , बेचारी पब्लिक ए टी एम् की लाइन से त्रस्त है . समाजवादियों ने तो एकता…

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एक पत्र संत वेलेंटाइन के नाम

suman

संत वेलेंटाइन सुनो ! आजकल बड़ा जलवा है गुरु तुम्हारा । फेसबुक,ट्वीटर, व्हाट्स एप,अख़बार के पन्ने, किसी कालखण्ड का बुद्धू बक्सा आज जो बेहद चतुर और अनिवार्य हो गया है उसमें , हर कहीं,हर ओर तुम्हारी चर्चा है।इतनी चर्चा है कि वसंत का मुख भी पीला पड़ गया है।वैसे पीला सिर्फ तुम्हारी वजह से नहीं खुद उसके चाहने वालों की तरफ़ से भी है।कोयल नहीं कूकती, मंजरियाँ दूर -दूर तक नहीं दीखतीं, मदनोत्सव नहीं होता तो कैसे लोग जान लें कि वसन्त आ गया।नयी -पुरानी पीढ़ी ने मान लिया है कि…

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