सब मन भावन है बसंत में

sk chaturvedi

सब कुछ पावन है, बसंत में, सब मन-भावन है बसंत में। खिले फूल, पेंड़ो पर, मंज़र, चले मस्त, बौराए, मधुकर, सरसों की,क्यारी, इठलाती, फैले खुशबू, दिग-दिगंत में, सब मन-भावन है बसंत में। पुरवा, आग लगाये, तन में, मोर-पपीहा हरसे वन में, वाणी में, मिसरी सी, घोले, कोयल कूके ,मधुर कंठ में, सब मन-भावन है बसंत में। सखी,सलेहर, प्रीतम ,प्रियवर, हर्षित-खुश,प्रफुल्लित,मिलकर, रंग,अबीर ,गुलाल, उड़ाकर, बिखरा देते राह -पंथ में, सब मन-भावन है बसंत में।ल दूर से आता भक्तों का दल, करने शिव-अर्पित,गंगा-जल, भांग-धतुरा, विल्व -पत्र दे, सहज-जोड़-लेता,अनंत, में, सब मन-भावन है…

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