परम_पूज्य_वो_नारी_है….

ratnesh-chnachal

सारी शक्ति जिसमें समाहित परम पूज्य वो नारी है सब कुछ उसके आंचल में है वो ऐसी अधिकारी है ।   बने कभी सावित्रि सीता कभी बने वो लक्ष्मीबाई, लिए खजाना ममता का प्रेम सुधा है वो बरसाई, हर युग में अपमानित होती ये कैसी लाचारी है ।   हुई प्रेमिका राधा तो एक अमिट इतिहास लिखा पत्थर की जब बनी अहिल्या नारी का संत्रास लिखा, मर्यादा कि रक्षा खातिर अपनों से वो हारी है ।   त्यागी है बलिदानी है सबसे बड़ी वो दानी है, लिया समय जब भी…

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मेहरारू आउर पिंजरा

women in caze

रोज पिंजरा मे दरद सहत टूटल हियरा जोरत ओकरे पीर ढोवत डहकल परान फतिंगा नीयन बुझानी मेहरारू ।   उ मनई रहे जवन आकास त दिहलस बाकि पतंग के डोर अपनही पकड़ के राखस मेहरारू बुझेनी ओकरा आपन घर आउर घरौंदा  ।   उ मनई रहे जवन बेदरदी नीयन रौंद के मुस्किया दिहलस मेहरारू सोचत रहे खुलल आकास मे उड़ल ।   उ मनई रहे जवन काट दीहलस ओकर पांख बन्द क दिहलस ओकरा पिंजरा मे ।   मेहरारू बन्द पिंजरा मे सातों जनम इहवें पूरा करेलीं फेरु सोचेलीं उतारल…

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मैंने पुरुषोत्तम राम दिया

yogi

8 मार्च विश्व महिला दिवस पर एक रचना…………! श्रृंगारों का झाँसा देकर, पैरों में पायल बाँध दिया जिसको मैंने जना उसी ने मुझको अबला नाम दिया। अपनों खातिर सती हुई मैं जौहर सा बलिदान दिया बन पाषाण कभी मैनें ही अपना जीवन दान दिया। अग्नि परीक्षा से मैं गुजरी पर अपनों का साथ दिया बिगड़ी हुई लकीरों आगे मैंने अपना माथ दिया। रखकर मुझको चौसर पर इतिहास नें कैसा मान दिया वस्तु बनाकर मुझको ही मेरा सबनें दान दिया। खूब जिया मैंने हर युग को जैसा जो अंजाम दिया फिर…

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