राखी के परवान

राखी1

बहिना के बा मन उमगाइल, राखी के परवान भइया नेहिया से अनजान ॥   खोरी – खोरी बाटे डेराइल निनियो के बा चैन हेराइल   गाँव शहर सुनसान बज़रिआ, सत्ता के अभिमान भइया नेहिया से अनजान ॥   बहिना के खोईंछा बा खाली रखिहा हमरे मुँहवा के लाली   अन धन ना रूपिया चाही , दीहा नेह सनमान भइया नेहिया से अनजान ॥   सगुन दिनवा राह निहारेली नेह क डोर हथवे बान्हेली   हहरि असीसिहें नइहरवा, रोजही साँझ बिहान भइया नेहिया से अनजान ॥   दुधही नहाया, पूतहीं फरिहा…

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