अनुक्रम

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आपन बात अथक लड़ाई आउर धीरज के परीक्षा लेत भोजपुरी भाषा आलेख सभ कमिटी आ मापदंड भोजपुरी के सांविधानिक मान्यता ला? – संतोष पटेल भोजपुरी के वर्तमान स्वरूप : गत्यात्मक आ विकासमान- डॉ रामरक्षा मिश्र विमल कविता डिस्को पंडित के नामकरण- गार्गी मिश्रा भइल नोटबंदी – उदय प्रताप द्विवेदी राम रखवारे  – राना रंजीत बासु बसंत लोभावत बा- योगेन्द्र “योगी” तोहार चेहरा हमरा खातिर चान हो गइल- अभिषेक भोजपुरिया चलत गइनी – राजीव उपाध्याय वसंत अइले नियरा- केशव मोहन पांडेय मोर दुवरिया अइहें ना – जयशंकर प्रसाद द्विवेदी भइया मलहवा…

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अथक लड़ाई आउर धीरज के परीक्षा लेत भोजपुरी भाषा

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अपना देश भारत मे हिन्दी के बाद सबसे जियादा लोगिन के मातृभाषा भोजपुरी कई दशक से अपने अस्तित्व के लड़ाई लड़ रहल बिया । चालीस के दशक से जवने भाषा के मान्यता के आवाज उठ रहल बा आउर ओकरे अस्तित्व के अनदेखी हो रहल बा , उहो एगो मिशाले बा । भोजपुरी भाषा के जनम आउर ओकर इतिहास 1000 बरिस से ढेर पुराना ह । एकर समय समय पर प्रमान सरकार के दीहल जा चुकल बा , बाकि हर बेरी कवनो – कवनो बहाना से मान्यता के बाधित कइल गइल…

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सभ कमिटी आ मापदंड भोजपुरी के सांविधानिक मान्यता ला?

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देश के संविधान लागू भइल त 14 को भाषा अष्टम अनुसूची में आइल। तब कवनो मापदंड ना तय भइल रहे। 1967 में सिंधी भाषा अष्टम अनुसूची में आइल। तबहुँ ना कवनो कमिटी ना कवनो मापदंड। 1992 में कोंकणी, मणिपुरी आ नेपाली के शामिल कइल गइल। ना कवनो कमिटी ना ना कवनो मापदंड।2004 में बोड़ो, डोगरी,मैथिली आ संथाली के सांविधानिक मान्यता मिलल। ओहि बेरा ना कवनो कमिटी बनल ना कवनो मापदंड तय भइल। हाँ 1996 में अशोक पावहा कमिटी बनल। जेकरा संविधान के अष्टम अनुसूची में शामिल करे खातिर भाषा के…

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भोजपुरी के वर्तमान स्वरूप : गत्यात्मक आ विकासमान

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अपना प्रिय अंदाज,मिसिरी के मिठास आ पुरुषार्थ के दमगर आवाज का कारन भोजपुरी शुरुए से आकर्षण के केंद्र में रहल बिया | भाषा निर्भर करेलेविशेष रूप से भौगोलिक कारन आ बोलेवाला लोगन के आदत,रुचि आ प्रकृति पर | विशेष परिस्थिति भी एह में आपन बरियार प्रभाव छोड़ेले | भोजपुरिया लोगन के अलग–अलग क्षेत्रन में प्रभावित करेवाला अलग–अलग कारकन का चलते भोजपुरी के भी कई गो रूप लउकऽता आ अभी तककवनो महाबीर एकरा के अनुशासित कऽके मानक रूप ना दे पवले | वर्तमान में ई काम आसान नइखे रहि गइल,बहुत कठिन…

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डिस्को पंडित के नामकरण

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सन १९८४ में जब राम नगीना मिसिर के बड़का लईका के बियाह ठनाईल त मिसराइन न्योतली मोहल्ला के पड़ाइन शुक्लाइन डाक्टराईन ठकुराईन गडाईन तिवराईन दुबाईन गुप्ताईन इंजीनियाराईन अउरि मालिक के दफ़्तर के हेड क्लर्क लालबिहारी मिसिर के मेहरारू लक्ष्मी के   २४ बरीस के होखलें दुन्नो मिसराइन के लईका बाकिर लक्ष्मी के लईका पप्पू के बियाहे में रघुवीर जाने अबेर भईल सकल से चकोर चित्त से पानी चरित्र से राम लक्ष्मी के छोट लईका बी.ए के पढ़ाई छोड़ दिहलें अउर सरकारी नोकरी नाहीं सपरल त करे लगलें पंडिताई बाऊजी के…

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भइल नोटबंदी

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भइल नोटबंदी भइल नोटबंदी इ गरवा के हड्डी भइल नोटबंदी   खबर जइसे आइल मचल बाटे हल्ला आ बैंके के नीचे जुटल बा मोहल्ला मरद मेहरारू आ हम आउर रुऊआ लगल सब निकाले आपन पान सऊवा त बिहने से लल्लन लगा लिहलें लाइन आ गड्डी क रुपिया ले अइलीं पड़ाइन आ सोचलस सभै कि लगा लीहिं छक्का त होखे लगल रोज धक्का पे धक्का लाइन में लग के लगल लोग बोले कि चोरवन क मोदिया बिगड़ले बा ठंडी ॥ भइल नोटबंदी…………………..   दुखा गइलें भइया,दुखा गइलीं भउजी दुखा गइलें उहो…

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राम रखवारे

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काहें  घबराता है राम के पियारे राम रखवारे हैं जब राम रखवारे राम रखवारे हैं जब राम रखवारे होजा मगन लागी लगन श्री राम से जी क्यों चुराते भला ऐसे तू काम से बिगड़ी बनेगी जो मन से पुकारे राम रखवारे हैं  जब  राम रखवारे काहे लजाए सरमाए पूजन से कुछ तो खबर हो क्या होता भजन से बीते क्यों समय काहें  ऐसे गवां रे राम रखवारे हैं जब राम रखवारे सर पर ना छाएगी गम की बदरिया प्रभु ने ओढ़ाई  माया रूपी चदरिया सबकी खबर लेंगे जो है बेसहारे…

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बसंत लोभावत बा

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झूमत,नाचत,गावत बा चहुँ ओर बसंत लोभावत बा, धानी चुनर ओढ़ले धरती लागे फागुन गीत सुनावत बा, रंग गुलाल उड़े मन में हियरा हिय से हरसायल बा, राई क फूल सिवान सोहै रहिला, मटरी गदरायल बा, देखि छटा अवनी के सुघर अमवाँ सँव से बउरायल बा, चाँद संगे हरसे चननी जुगनू रतिया भरामवत बा, बईठ के पीपर डारी कोयल रवि के भोरहीं गोहरावत बा, हँस पे होके बिराज बुझात की अम्ब मोरे घरे आवत बा, लागत बा महतारी मोरी आजु “योगी” पे नेह लुटावत बा।। योगेन्द्र शर्मा “योगी “

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तोहार चेहरा हमरा खातिर चान हो गइल

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तिरछी नजर से जे तू देखत बारु हमके, अब त तहरे हवाले हमार जान हो गइल। फिंका फिंका लागे सब मेवा मिठाई अब, मिसिरियो से मीठ तोहर मुस्कान हो गइल। अब त तहरे के देख करवा चौथ तुरीं हम, तोहार चेहरा हमरा खातिर चान हो गइल। काल्ह घोंसारी मे गइलू जब बन संवर के, तोहार दीवाना ई सगरी जहान हो गइल। सब कुछ न्योछावर बाटे तोहरा पर यार, पा लीं तोहे ई दिल के अरमान हो गइल। अब दिल में राखs भा मसल के फेंक द, कुर्बान तोह पे अभिषेक…

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चलत गइनी

rajiv-upadhyay

 रस्ता चले के रहल चलत गइनी अउरी मिलल जे मिलत गइनी। हिय मिलल मिलल जियरा कि जियत गइनी कि मुअत गइनी। मिलल जे मिलबे कइल कि साथ सभकर छोडत गइनी। जे मिली संगे ऊ चलबे करी सोचि के हम उडत गइनी। बाकिर काहाँ होला अइसन कि अइसहीं हम सियत गइनी। जे साथ बा कबो जइबे करी इहे जिनगी भर कहत गइनी। कि साथे काहाँ सभ केहू चले सोचि हर मोड छोडत गइनी।    राजीव उपाध्याय 

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