कुछ मुक्तक

abhishek1

गुलाब के खुशबू के तरे रसल बा केहु नेह नहाइल नयनन मे बसल बा केहु दिल के धड़कन धड़क ई कहत बा हमके याद कर के दूर हंसल बा केहु।   हमार दिल के दरवाजा खटखटावल केहु, हमार फोटो आज सिना से सटावल केहु, हमार प्यार ह पूजा पावन गंगा पानी जस बिना मिलले हमे प्रेम रस में पटावल केहु।   अब आँखिन उनकर राह निहारत बानी, दिल के दुआर उनका बदे बहारत बानी, बार बार सिना से सरकत बा ओढ़नी केहु उनका सिवा देखे ना सम्हारत बानी।   अभिषेक…

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