राखी के परवान

राखी1

बहिना के बा मन उमगाइल, राखी के परवान भइया नेहिया से अनजान ॥   खोरी – खोरी बाटे डेराइल निनियो के बा चैन हेराइल   गाँव शहर सुनसान बज़रिआ, सत्ता के अभिमान भइया नेहिया से अनजान ॥   बहिना के खोईंछा बा खाली रखिहा हमरे मुँहवा के लाली   अन धन ना रूपिया चाही , दीहा नेह सनमान भइया नेहिया से अनजान ॥   सगुन दिनवा राह निहारेली नेह क डोर हथवे बान्हेली   हहरि असीसिहें नइहरवा, रोजही साँझ बिहान भइया नेहिया से अनजान ॥   दुधही नहाया, पूतहीं फरिहा…

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संवरिया मोरे

djp

रिम झिम पड़ेले फुहरिया , संवरिया मोरे । रहिया निहारत  गुजरिया , संवरिया मोरे ॥   बीतल जेठ अब घन घहराइल चढ़त असाढ़ रोपनी नियराइल रहि रहि पुकारत बहुरिया , संवरिया मोरे ॥   लहरत बिरवा  सोहरे लागल बरसत धार मे मनवा पागल उड़ी गइल मोर निनरिया , संवरिया मोरे ॥   कुल्हि सिवाने चलत रोपनिया खेत मे  गावत नइकी धनियाँ मचलेले मोर कमरिया , संवरिया मोरे ॥   संगवे तोहरे  हमहूँ चलती सभके संगवे धनवाँ रोपती तोसे मिलाई नजरिया , संवरिया मोरे ॥   जयशंकर प्रसाद द्विवेदी  

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मोर दुवरिया अइहें ना

shahid divas

मइया भारती के संस्कार के पुजरिया मोर दुवरिया अइहें ना ॥ करिहें देश रखवरिया , मोर दुवरिया अइहें ना ॥   सीमवाँ पर दीहें आपन जनवाँ लुटाई हर घरी देश खातिर छतिया सजाई । उनुके से लउकत टह टह अंजोरिया मोर दुवारिया अइहें ना ॥ करिहें…………   देश से गुलमिया के दीहने मेटाई बिना गिनले आपन सिरवा कटाई काँपत दुसमन देखी भगत के तेवरिया मोर दुवरिया अइहें ना ॥ करिहें…………   सुखदेव भगत सिंह राजगुरु भाई भइलें अमर आपन आहुति चढ़ाई देश खाति अरपित जवानन के उमिरिया मोर दुवरिया अइहें…

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वसंत अइले नियरा

K M Pandey

हरसेला हहरत हियरा हो रामा, वसंत अइले नियरा।। मन में मदन, तन ले ला अंगड़ाई, अलसी के फूल देख आलस पराई, पीपर-पात लागल तेज सरसे, अमवा मोजरीया से मकरंद बरसे, पिहू-पिहू गावेला पपीहरा हो रामा, वसंत अइले नियरा।। मटरा के छिमिया के बढ़ल रखवारी, गेहूँआ के पाँव भइल बलीया से भारी, नखरा नजर आवे नजरी के कोर में, मन करे हमहूँ बन्हाई प्रेम-डोर में, जोहेला जोगिनीया जियरा हो रामा, वसंत अइले नियरा।। पिया से पिरितिया के रीतिया निभाएब, कवनो बिपत आयी तबो मुस्कुराएब, पोरे-पोर रंग लेब नेहिया के रंग में,…

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सरस्वती वंदना

saraswati

लिहले  हिय सागर भरिह  ज्ञान गागर माई   गुन आगर नमन वीणा वादिनी || हो मइया !  सादर नमन …… नरियर फूल अक्षत चन्नन  मूल रक्षत उहाँ  बसत सत्सत सदजन हिय हुलासिनी || हो मइया !  सादर नमन …… सिर  नवायीं चरण करs अज्ञान छरण बीपत  करs हरण सरस मन निवासिनी || हो मइया !  सादर नमन …… विनय से होत जय मिट जाई कुल भय होखिहें  बिपत छय मनुज दरद विनासिनी || हो मइया !  सादर नमन …… ब्रम्ह  दुलारी  माई मन  अंजोर  लाई आपन  मन  भाई कमल नयन विराजिनी…

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बसंत लोभावत बा

saraswati

झूमत,नाचत,गावत बा चहुँ ओर बसंत लोभावत बा, धानी चुनर ओढ़ले धरती लागे फागुन गीत सुनावत बा, रंग गुलाल उड़े मन में हियरा हिय से हरसायल बा, राई क फूल सिवान सोहै रहिला, मटरी गदरायल बा, देखि छटा अवनी के सुघर अमवाँ सँव से बउरायल बा, चाँद संगे हरसे चननी जुगनू रतिया भरामवत बा, बईठ के पीपर डारी कोयल रवि के भोरहीं गोहरावत बा, हँस पे होके बिराज बुझात की अम्ब मोरे घरे आवत बा, लागत बा महतारी मोरी आजु “योगी” पे नेह लुटावत बा।। “योगी”

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सीरत के बतिया

djp

सूरत  ना हमरी निहारी ए राजा ॥ सीरत के बतिया बिचारीं ए राजा ॥   ढलती उमिरिया मे चिचुकल चेहरवा अचके   भुलाइल  गावल   कहरवा केतना ई देहिया निखारी ए राजा ॥ सीरत के बतिया………..   कसक न मनवा ठसक नाही चलिया कनवाँ  मे  करकत सरकेले बलिया बीतल जवन मत उचारीं ए राजा ॥ सीरत के बतिया………..   गरदिश मे नीकसल बाली उमिरिया भइल मोहाल मोर तिरछी नजरिया हियवा के टीस मत उभारीं ए राजा ॥ सीरत के बतिया………..   कहवाँ बचल अब पतरी कमरिया घेरले जाता रोजे नवकी बीमरिया पहिलकी…

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ई त समय के हs संयोग

k-m-pandey

कइले बाटे घात कुठहरा समय-समय पर लोग। ई त समय के हs संयोग।।   लोगवा के मतिया के गतिया कबो समझ ना आवे अपने जनमल अपने माई के बेर-बेर लात देखावे कइसे पीर पराई भाई भाषा के धइलस कइसन रोग। ई त समय के हs संयोग।।   आपन-आपन राग अलापे एक्के महतारी के पूत एक्के मंजिल पर डगर अलग बा बने सभे अवदूत केहू करे सन्मान भाव से करेला केहू उपभोग। ई त समय के हs संयोग।।   अपना-अपना दमभर लोगवा निशदिन जोर लगावे भोजपुरी भाषा अबहिन ले तबहूँ त…

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गज़ल

saurabh

एक्के पैना से सबके चरावल गइल। नाही मानल त जबरी मनावल गइल।। आग लागल बा देहिया में ई सोच के। हमरा ढ़िबरी के काहे बुतावल गइल।। हई चमकsता कोठी पसीना से हमरा। तब्बो झोपड़ी के काहे जरावल गइल।। सेवकाई में बीतल बा जिनगी जेकर। काहे कुकुर नियन दुरदुरावल गइल।। ताज केहूओ के माथे सजे का फरक। दुःख हमनिए बदे बा बनावल गइल।। बाटे कुदरत के गजबे करिश्मा ए बाबू। दीन-दुखियन के हरदम सतावल गइल।। रो-रो, हँसे ले ‘सतरष’ कहे वीर जागs। शक्ति के आगे माथा झुकावल गइल।। सौरभ सतर्ष नरईपुर,…

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खतम होईल जाता अब गउँवा देहतिया

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अईसन शहरिया के बयरिया बा बहल गउँवा के लोगवा होईल जा बेकहल शहर के रंग-ढंग में रंगाये के खातिर गउँवा छोड़ डहर शहरिया के चलल पहिरे बुढ़ऊ पैंट छोड़ कुर्ता धोतिया खतम होईल जाता अब गउँवा देहतिया खतम होईल जाता…. कहाँ रह गईल अब मटिया के घरवा कहाँ रह गईल अब छप्पर खपड़वा कहाँ घर के सम्हना में बा बेदा-बेदिया जे पर खेले छोटका कि होते सबेरवा लेवराईल का चीज बुझा नाही बतिया खतम होईल जाता अब गउँवा देहतिया खतम होईल…….. ओसारा-ओसारी ,पलानी-दलानी होलाऽ का पता ना बाटे ओरवानी कोठिला-कोठीली…

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