पियSकड़वा यार

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हमार गाँव के तीन यार रले। सुखन मियाँ,  रुबिन मियाँ , साधु पासवान। तीनो मे बहुत दोस्ती रहे। तीनो एके साथ ईटा पाथे चेमनी पर जा सन और एके साथे ईटा पाथ के चेमनी के पथेरी से वापस आवसन। अगर कवनों दोस्त के ईटा पाथे मे देरी हो जाए तS तीनो एक दुसरा के मदद कके जल्दी जल्दी एके साथे ईटा पाथ के चट्टी पर पहुँचत रले सन। जब तीनो यार चट्टी से वापस पैदल आवसन तS केहु माई के लाल ना रहे जे ऐ ई तीनो से बतीया लेव।…

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ए अरियार का बरियार

K M Pandey

आजु जीउतिया हऽ। जिउतिया के शुद्ध नाम ह जीवित्पुत्रिका माने जे जीअत पुत्रन के माई होखे। कुआर महीना के अन्हरिआ के अष्टमी के ई तप-पर्व पड़ेला। माई लोग अपना लइकवन खातिर निर्जला व्रत बाऽ लोग। जीभ पर एगो बूंद पानी ना। बेटा खातिर ई व्रत एगो तपस्या कहल जाला। आजु एह तपस्या के अवसर पर हमके हमरा माई के ईयाद आवता। भोरहरिए से माई के ईयाद आवताऽ। आज सभे सरगही खइले होई। हमार मेहरारूओ खइली हऽ। ना ऊ कबो उठावेली आ ना हम उठेनी। बाकिर हमार माई! ….. जबले हम…

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बुढ़िया माई

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१९७९ – १९८० के साल रहल होई , जब बुढ़िया माई आपन भरल पुरल परिवार छोड़ के सरग सिधार गइनी । एगो लमहर इयादन के फेहरिस्त अपने पीछे छोड़ गइनी , जवना के अगर केहु कबों पलटे लागी त ओही मे भुला जाई । साचों मे बुढ़िया माई सनेह, तियाग आउर सतीत्व के अइसन मूरत रहनी , जेकर लेखा ओघरी गाँव जवार मे केहु दोसर ना रहुए । जात धरम से परे उ दया के साक्षात देवी रहनी । सबका खाति उनका मन मे सनेह रहे , आउर छोट बच्चन…

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अवघड़ आउर एगो रात

aghore

रहल होई १९८६-१९८७ के साल , जब हमारा के एगो अइसन घटना से दु –चार होखे के परल , जवना के बारे बतावल चाहे सुनवला भर से कूल्हि रोयाँ भर भरा उठेला । मन आउर दिमाग दुनों अचकचा जाला । आँखी के समने सलीमा के रील मातिन कुल्हि चीजु घुम जाला । इहों बुझे मे कि सांचहुं अइसन कुछो भइल रहे , कि खाली एगो कवनों सपना भर रहे । दिमाग पर ज़ोर डाले के परेला । लेकिन उ घटना खाली सपने रहत नु त आजु ले हमरा के ना…

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