साहित्य रत्न

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      किसी देश के सांस्कृतिक वैभव का परिचय वहाँ के  लोक साहित्य में  होता है, जिसमें उस देश और समाज के राजनैतिक-सामाजिक वैभव कि गाथा होती है . इसी तारतम्य में कविता ,कहानी , गीत के साथ साथ अन्य सभी साहित्यिक विधाओं को वाणी प्रदान की जाती है . जब मनुष्य अपने भाव और अनुभवों को शब्दों की लड़ियों में पिरो देता है , तो वह साहित्य बन जाता है . अभिब्यक्ति की इसी परंपरा से हम हर युग के समाज को आसानी से पढ़ने – समझने में सफल होते हैं…

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भोजपुरी के प्रखर प्रतिमूर्ति “डॉ अशोक द्विवेदी “

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अपनी भाषा , अपनी बोली भोजपुरी के साथ साथ, अपनी माटी के सोंधेपन से भरे  कवि डा. अशोक द्विवेदी की लेखनी अपने पाठक को अपने कथारस और काब्यरंग  में रंगकर पात्रों के संग ला खड़ा करती है | डॉ अशोक द्विवेदी के भाषा शिल्प, ज्ञान  और लेखन में  सौन्दर्य बोध की पकड़ पाठक को वह सब कुछ दे जाती है जिसे वह साहित्य में खोजता फिरता है | भाषा की सहजता , लालित्य , जगह जगह उकेरे गए विम्ब अत्यंत मनोहारी होते हैं  |आदरणीय डॉ अशोक द्विवेदी जी का जन्म…

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आधुनिक भोजपुरी गजलो का चमकदार सितारा “मनोज भावुक”

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मनोज भावुक ने बिहार, सिवान के एक छोटे से गाँव कौसड़ से अपनी साहित्यिक यात्रा शुरू की और अफ्रीका एवं लन्दन में जाकर भोजपुरी का प्रचार-प्रसार किया. उत्तर प्रदेश के हिन्डाल्को,रेनुकूट के मजदूर नेता एवं वरिष्ठ समाजसेवी रामदेव सिंह एवं गृहिणी सुनयना देवी के पुत्र मनोज कुमार सिंह उर्फ़ मनोज भावुक को साहित्यिक प्रतिभा विरासत में मिली है . मनोज के बड़े मामा छपरा निवासी प्रो० राजगृह सिंह हिन्दी -भोजपुरी के जाने-माने साहित्यकार हैं. साथ ही अभिनय, एंकरिंग एवं पटकथा लेखन, भोजपुरी भाषा के विकास मे अनवरत कार्यशील हैं |…

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भोजपुरी रचनायों में यथार्थ का सार्थक दिग्दर्शन के पर्याय “जयशंकर प्रसाद द्विवेदी”

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भोजपुरी कविता लेखन से शुरू होकर भोजपुरी में रच बस जाने वाले भोजपुरी के शशक्त रचनाकार जयशंकर प्रसाद द्विवेदी का जन्म उत्तर प्रदेश के वाराणसी जिले (वर्तमान – चंदौली ) के अंतर्गत चकिया तहसील के गाँव बरहुँआ में  श्री राधेश्याम  द्विवेदी और श्रीमती लल्ली द्विवेदी के आँगन में हुआ था | बचपन से ही साहित्यिक रुझान रखने वाले जयशंकर प्रसाद द्विवेदी ने साइंस में स्नातक करने के उपरान्त इंजीनियरिंग की डिग्री इलेक्ट्रानिक्स और कम्युनिकेसन में ली . बचपन से ही साहित्य पढ़ने का बहुत गहरा शौक रहने के बावजूद पिता…

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नवगीत विधा के एक नए हस्ताक्षर “डॉ अक्षय कुमार पांडेय”

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स्तम्भ लेखन से शुरू होकर नवगीतों की देहरी का सांकल खटखटाने के साथ उस पर अपना एक स्पष्ट हस्ताक्षर क्रमशः छोड़ रहे डॉ अक्षय कुमार पांडेय का जन्म उत्तर प्रदेश के गाजीपुर जिले के रेवतीपुर (रंजीत मुहल्ला ) नामक गाँव में  श्री गुप्तेश्वर नाथ पाण्डेय जी के यहाँ  हुआ था .  श्रीमती रामदेई पाण्डेय  जी  के  मातृत्व ने उनके प्रखर चेतना को वैसी ही गति दी . जिससे वे पूर्वांचल वि. वि. जौनपुर से डाक्टरेट की उपाधि ग्रहण करने के उपरान्त हिंदी के प्रवक्ता के रूप में इ. का. करण्डा, गाजीपुर में अपनी…

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भोजपुरी नाटकों का प्रखर हस्ताक्षर “नंदकिसोर मतवाला”

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भोजपुरी में रचित नाटको में गंभीरता ,गुरुता और ग्राह्यता की बात बिना श्री नंदकिशोर मतवाला जी के अधूरी प्रतीत होती है .श्री नन्दकिसोर मतवाला जी का जन्म 5 जनवरी 1940 ई. में बिहार के मुजफ्फरपुर जिले के साहेबगंज में स्व. श्री मोहन शाह एवं स्वधन्यमान माताजी स्व. श्रीमति मंतुरन देवी के यहाँ हुआ था . मतवाला जी के पिताजी के स्वतंत्रता सेनानी थे . इन्होने अपनी साहित्य रत्न की उपाधि विशारद प्राकृत विश्वविद्यालय , घेवरी (आसाम) से ग्रहण की . भोजपुरी नाटक विधा पर इनकी बहुत अच्छी पकड़ रही .साथ…

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अनगिनत विधाओं का एक स्वर ” पवन नंदन केसरी”

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अनेक विधाओं पर सामान रूप से अधिकार रखने वाले , हिंदी को जीते हुए भोजपुरी की स्वांस लेने वाले ,लेखनी के प्रवाह को अविरल गति निःसंकोच प्रदान करने वाले श्री पवन नंदन केसरी जी का जन्म 13 जनवरी 1952 ई को बिहार के बक्सर जिले में स्वतंत्रता सेनानी स्व. श्री भोलानाथ केसरी जी के यहाँ हुआ था .बहुमुखी प्रतिभा के धनी श्री पवन नंदन केशरी एक साथ ढेर सारी विधाओं पर कार्य करते हुए सभी में अपनी उपस्थिति दर्ज करवाई .अपनी शिक्षा के उपरान्त उन्होंने अपनी सेवायें पवान्नंदन सरस्वती विद्यामंदिर…

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आधुनिक भोजपुरी ग़ज़ल के पुरोधा ” जगन्नाथ “

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भोजपुरी साहित्य में जब हम भोजपुरी गजल की बात करते हैं हमारे जगन्नाथ जी लिखित ‘भोजपुरी गजल के विकास-यात्रा’ नामक पुस्तक सबसे पहले दृष्टिगोचर होती है इसमें उन्होंने भोजपुरी ग़ज़ल के इतिहास का निर्धारण किया है (क) आरम्भ काल-19 वीं सदी के अंतिम चरण 1900 ई तक(ख) मध्य काल- सन 1901 ई से सन 1960 तक(ग) प्रथम चरण – सन 1961 से सन 1975 ई तक, द्वितीय चरण -1976 से अध्यावधि. सन 1895 के भोजपुरी ग़ज़ल संग्रह तेग अली ‘तेग’ के प्रकाशन के 81 वर्षों के लम्बे अंतराल के पश्चात…

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माटी के पीर उचरत गजलन के पुरोधा “आसिफ रोह्तासवी “

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अपने माटी , सचमुच के आम मजदूर , किसान , गरीब की पीड़ा को गजलों की माला में पिरोने के सिद्धहस्त भोजपुरी गजलकार आसिफ रोहतासवी  ( डा. इन्द्र नारायण सिंह ) किसी परिचय के मोहताज नहीं हैं . अपने विचारो में वामपंथ का झुकाव रखने वाले आसिफ रोह्तासवी की पीड़ा जो सचमुच आम जन की पीड़ा है, स्वतः उनके गजलों में मुखरित हो उठती है . भोजपुरी गजल विधा के इस मूर्धन्य गजलकार का जन्म १ नवम्बर १९६० को ग्राम सकरी पो. कुदरा जिला कैमूर , बिहार में हुआ था…

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जिन्दगी की वास्तविक पीड़ा को कहानी में ढालने की कला का मूर्त रूप : ‘आशा रानी लाल ‘

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कथा , कहानी और  निबंध में समाज की परिस्थिति जन्य पीड़ा को शब्दों में पिरोने की कला की साम्राज्ञी श्रीमति डा. आशा रानी लाल ने अमीरी और गरीबी के बीच की खाईं से  लेकर उन तमाम अनकहे सामाजिक पीड़ा को अपनी कहानियों का कथ्य बनाया है जो पाठक को सहज में झकझोर जाता है . भोजपुरी साहित्य की इस मूर्धन्य लेखिका  का जन्म 16 अगस्त १९४० को गाँव संवरुपुर , जिला बलिया (उ.प्र.) में स्व. श्री रास विहारी सिन्हा जी के यहाँ हुआ था . अपनी स्नाकोत्तर की शिक्षा हिंदी…

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