घृणा

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एक बेर के बात हS कि हम आनंद विहार स्टेशन से रेलगाड़ी पकड़ के छपरा अवत रहनी। टिकस रिजर्वेशन रहे पर ईहे लगभग 450 के आसपास वेटिंग  रहे। अब राउरे  लोग तS समझिये गइल होखम कि 450 वेटिंग के बाद हमरा बइठे के कहाँ जगह मिलल होई। पहिला बेर अइसन भीड़ रिजर्वेशन बोगी मे हम देखले रहनी। टिकट कंफ्रम वाला लोग के जब पेशाब लागे तS ओ लोग के सोचे के पड़े कि कवना शौचालय मे जाई जवना मे आदमी ना बैठल होखे। खाएँ पिये के समान बेचे वाला तS…

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मोल

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यह एक परिवार की कथा हैं। वर्मा जी जिनकी मृत्यु हो चुकी है। वर्मा जी की धर्मपत्नी देवकी देवी अपने एकलौते बेटे रवि का लालन – पालन अच्छा से करने के लिए क्या-क्या ना की। यहाँ तक कि जब रवि अपनी पढ़ाई बारहवीं से आगे करने को सोचा तो उसकी माँ ने पुरा-पुरा साथ दि। पहले केवल सिलाई करके ही घर और रवि की पढ़ाई की जिम्मा उठाती थी। अब रवि के पढ़ाई के लिए ज्यादा पैसा की जरुरत बढ़ी तो वह रात को सिलाई करती और दिन मे धनी-मनी…

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साधु बाबा आउर शर्मा जी

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एक बेर एगो शहर मे एगो लमहर सिद्ध साधु अपने 2-3 चेलन के संगे पहुंचलन । उनुकर चेला लोग चारो ओरी घूम घूम के उनुका बारे मे परचार करे लगलन । धीरे धीरे सभके पता चलल कि साधु बाबा ढेर जानकार मनई बाड़ें । उनुका जीभ पर सुरसती माई वास करेलिन । हाथ देख के जेकरा उ जवन बतावत बाटें , कुल्ह ठीक होत बा । ई बात ओहिजा रहे वाला शर्मा जी के मालूम भइल । एक दिन सबेरहीं शर्मा जी नहा धो के साधु बाबा के लग्गे पहुंचलन…

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प्यार, परिवार, बोझ

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देख सतीश तोरा के समझा दे तानी ते आज के बाद हमारा और हमारा मोहब्बत के बारे मे कुछ भी कहलीस तS हमारा से बुरा केहु ना होई। ई तेवर सोनु के देख के तS अजबे महसूस भईल हमनी सब मित्र सन के। ई बात तब के हS जब हम, मनीष, अमरजीत, इरसाद, दीपक, बिजेन्दर सब मित्र कालेज के प्रांगन मे बईठ के हँसी मजाक करत रनी सन। सतीस सोनु के गर्लफेंड के बारे मे मजाक कS देले रहे। ई बात पर सोनु सतीस से दु-तीन हफ्ता तक बात ना…

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माई माईए होखेले

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“माई माईए होखेले , केतनहुं बड़ हो जा , कुछु क ल , भले जग काहे ना जीत ल लेकिन ओकर नज़र में तू बच्चा ही रहब, ओकर फिकर करे के आदत कबहुं ना जाला” :- रमेश इ सब बात सोचत-सोचत तेज़ी से घर के तरफ बढ़लन । रात के नौ बजत रहे आ उ अभी ले शहर में ही कवनो काम में उलझल रहलन । माई के फोन आइल रहे कहत रहली “आव घरे हम तोहार उपाय लगावतानी , तू नू साफा बिगड़ गईल बाड़ । भला हेतना रात…

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दो बेटी की हत्या

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हमारा मोहल्ले मे एक लवारिश लाश एगो कुआ मे पड़ल मिलल बा। पुरा गाँव भर खलबली मच गईल। पुलिस भी घटना स्थल प पहुँच गईल। लाश त औरत के हS। पुलिस गाँव के लोग से पुछ-ताछ करे लागल। केहु पहचान ना पावे की ई कवन औरत हिअ काहे कि ऊ औरत के मुँह प तेजाब डाल के जला देहल रहे। पुलिस लाश के पोस्ट मास्टम ला गाड़ी प रख के और अब जाँच परताल मे लग गईल। लाश के पुरा गौर से पुलिस देखलस तS एक दुगो सुराग नजर आ…

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अबही समय लगी

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आजकल रोग अउर बेमारी क आफर चलत बा एगो प दू फीरी लगत बा । सुगर देखावै जा थाईराइड भी निकलिए  जाई ।  ब्लडप्रेसर भी बढ़ल रहेला इहो बिकास क राह धईलs ।  समझ मे ना आवत बा ई शरीरी क का गत लिखल बा । जबकि हमने दरसन क बात ढेर कइल जाला , बतियावत मे त वैसहु कोई ना पायी लेकिन इ सच बा रोजै जीयै क मनसा बढ़त जाले । अस्पताल पहुँच के देखा त सगरी दुनिया बेमार ह। हमहूँ सोचली कि आज डाक्टर के तनि देखा…

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भूल या चोरी

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जानी नाम का एक मेरा मित्र है। कुछ दिन पहले वह मिला था तो काफी उदास था। मैने उसका उदासी का कारण जानना चाहा। जानी बहुत ही अच्छा एक कवि है। बहुत अच्छी अच्छी कविताये उसके कुछ पत्रिका मे छपी है। और आज फेसबुक के जमाना आने पर वह फेसबुक पर अच्छी अच्छी कविता पोस्ट करते रहता है। फेसबुक पर कविता पोस्ट करने से उसके कुछ अच्छे लोग का साथ मिलने लगा, और उन अच्छे लोग मे उसे एक ऐसे व्यक्ति से भेट हो गया जो साहित्य के बहुत ही…

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अपनो हँसी

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एगो गाँव में एगो बहुते पहुंचल साधु महाराज जी पधरलन । गाँव के सब लोग उनकरा के आपन आपन दुखरा सुनाए खातिन पहुंच गइल । कोई कहे बाबा जी हमर बेटवा के अइसने आशीर्वाद दिहि की हमार बेटा के सरकारी नौकरी लाग जाए ! कोई कहे महात्मा जी अइसन हमारा के आशीर्वाद दी ही की हमर घर में खाली पोता के ही किलकारी गूंजे । एगो बड़ी कमजोर बिमारी आह आदमी बाबा जी के पास आपन दुःखरा लेकर आइल कि बाबा जी हम त संयमित जीवन बितावइला फिरो रोगिए बानी…

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डूबती नईया

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“माँ ओ माँ , मेरा होमेवर्क करवा दो । एक चित्र दिया है टीचर ने उसपर कुछ लिखना है । ” ये सुन माँ थोड़ी चिढ़ गयीं । त्यौहार का दिन था ,वैसे ही बहुत काम थे , शाम को मेहमान आने वाले थे । उन्होंने कहा , ” शिल्पा , खुद ही कर लो बेटा । आज तो मुश्किल है तुम्हारी कोई मदद नहीं कर सकती । और हो सके तो तुम अपना काम निबटा कर मेरी मदद करने आ जाओ । ” “अरे माँ , क्या आप भी…

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