भोजपुरी कहावतें

guru

बिच्छी के मंतर ना आवे , साँप के बियरी हाथ बढ़ावे चोर चोरी से जाय , हेरा फेरी से ना ओरी तर के भूत जाने सात पुहुत हारे त हूरे जीते त थूरे गांठ के हलुक बात के धनी भर घर देवर भतार से ठाँठा बुझेली चिलम चढ़े ला अंगारी बिन घरनी घर भूत के डेरा ,घरनी अइली त भूतवे डेरा फटक चंद गिरधारी , लोटा ना थारी भइल बियाह मोर करबे का आनकर आटा आनकर घी , चाँप चाँप बाबाजी पिया भए कोतवाल अब डर काहे का ससुरा से…

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गोधन बाबा चलले अहेरिया

k-m-pandey

अभी न कतहूँ से दिवाली के उमंग कम नइखे भइल कि गोधन बाबा के कुटाए के दिन आ जाला। अभी ठीक से दिवाली के दिअरीओ नइखे बिनाइल। चारूओर पटाखा के बारूद के गंध फइलल बा। फाटल-जरल कागज अभी ठीक से बहराइलो नइखे। मोमबत्ती के जारन अभीन छोड़ावलो नइखे गइल। घर-दुआर, खान-पान सबमें अभीन तेल के बास बा। नवका कपड़ा के आकर्षएा अभी कम नइखे भइल। अभीन घर में मीठाई भरले बा कि बिहाने उठते दीदी खातिर भजकटेया जोहाये लागल। गोधन-पूजा अपना भोजपुरिया समाज में एगो दोसरे रूप में प्रस्तुत होला। गोवर्धन…

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