भोजपुरी कि संवैधानिक मान्यता के लिए अब तक किये गए सामाजिक प्रयास

santosh patel

भोजपुरी आन्दोलन भोजपुरी जनपदीय योजना का ही एक अंग है जिसका प्रवर्तक – पंडित बनारसी दास जी चतुर्वेदी हैं I उन्हीं के प्रयास से सन 1930 ई. में “ब्रज साहित्य मंडल” की स्थपाना आगरा में हई थी और उन्हीं की प्रेरणा से सन 1946 ई में भोजपुरी आन्दोलन का सूत्रपात हुआ, जिसका माध्यम बलिया के भोजपुरी साहित्यकार कुलदीप नारायण झड़प को बनाया गया था I फलस्वरूप “अखिल भारतीय भोजपुरी साहित्य –सम्मलेन” का पहिला अधिवेशन दिन्नाक 2-3 मार्च 1947 ई को सिवान में सफलतापुर्वक सम्पन्न हुआ क्योंकि उक्त अधिवेशन में प्राय: समस्त भोजपुरी क्षेत्र के…

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अन्तर्राष्ट्रीय मातृभाषा दिवस और भोजपुरी

santosh patel

भाषाएं  संस्कृति की मौखिक अभिव्यक्ति हैं। हमारे मूर्त  और अमूर्त विरासत के संरक्षण  व विकास की सबसे शक्तिशाली उपकरण भी। भाषा की शक्ति बंगला भाषा के सम्मान संघर्ष में दिखाई  देता है जो धर्म जाति- पाति, जमात,संप्रदाय व धर्म से  ऊपर दिखाई देता है।2009  से यूनेस्को द्वारा 21  फ़रवरी को  प्रत्येक वर्ष अन्तर्राष्ट्रीय  मातृभाषा  दिवस मनाने की घोषणा  बंगला भाषा के अस्मिता और सम्मान संघर्ष की कोख की उपज है। भारत से अलग होकर बना  जिसका एक हिस्सा पूर्वी पाकिस्तान भी था जो दरअसल आज का  बांग्ला देश है। 1905 में धर्म  आधार…

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