राखी के परवान

राखी1

बहिना के बा मन उमगाइल, राखी के परवान भइया नेहिया से अनजान ॥   खोरी – खोरी बाटे डेराइल निनियो के बा चैन हेराइल   गाँव शहर सुनसान बज़रिआ, सत्ता के अभिमान भइया नेहिया से अनजान ॥   बहिना के खोईंछा बा खाली रखिहा हमरे मुँहवा के लाली   अन धन ना रूपिया चाही , दीहा नेह सनमान भइया नेहिया से अनजान ॥   सगुन दिनवा राह निहारेली नेह क डोर हथवे बान्हेली   हहरि असीसिहें नइहरवा, रोजही साँझ बिहान भइया नेहिया से अनजान ॥   दुधही नहाया, पूतहीं फरिहा…

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सीरत के बतिया

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सूरत  ना हमरी निहारी ए राजा ॥ सीरत के बतिया बिचारीं ए राजा ॥   ढलती उमिरिया मे चिचुकल चेहरवा अचके   भुलाइल  गावल   कहरवा केतना ई देहिया निखारी ए राजा ॥ सीरत के बतिया………..   कसक न मनवा ठसक नाही चलिया कनवाँ  मे  करकत सरकेले बलिया बीतल जवन मत उचारीं ए राजा ॥ सीरत के बतिया………..   गरदिश मे नीकसल बाली उमिरिया भइल मोहाल मोर तिरछी नजरिया हियवा के टीस मत उभारीं ए राजा ॥ सीरत के बतिया………..   कहवाँ बचल अब पतरी कमरिया घेरले जाता रोजे नवकी बीमरिया पहिलकी…

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खतम होईल जाता अब गउँवा देहतिया

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अईसन शहरिया के बयरिया बा बहल गउँवा के लोगवा होईल जा बेकहल शहर के रंग-ढंग में रंगाये के खातिर गउँवा छोड़ डहर शहरिया के चलल पहिरे बुढ़ऊ पैंट छोड़ कुर्ता धोतिया खतम होईल जाता अब गउँवा देहतिया खतम होईल जाता…. कहाँ रह गईल अब मटिया के घरवा कहाँ रह गईल अब छप्पर खपड़वा कहाँ घर के सम्हना में बा बेदा-बेदिया जे पर खेले छोटका कि होते सबेरवा लेवराईल का चीज बुझा नाही बतिया खतम होईल जाता अब गउँवा देहतिया खतम होईल…….. ओसारा-ओसारी ,पलानी-दलानी होलाऽ का पता ना बाटे ओरवानी कोठिला-कोठीली…

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मन उमगाइल

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जागल भोजपुरिया बेटहना हो रामा , मन उमगाइल |   जंतर मंतर से बोले आपन बोलिया नेतन परेतन खोले लागल पोलिया अबकी दियाई ओरहना हो रामा , मन उमगाइल |   संसद के भितरी से उठिहें अवजिया भोजपुरी माई के मिली सभ नवजिहा अब नाही चली बेकहना हो रामा , मन उमगाइल |   अठवीं अनुसूचिया पर होई अब बतिया हिल मिल करिहें मांग सगरी संघतिया सुनी राज हमरो सरहना हो रामा , मन उमगाइल |     जयशंकर प्रसाद द्विवेदी  

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देशवा के शान मोर किसान

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होत सबेर गूंजे चिरइन के शोर मोर बलमा गइलें खेतवा के ओर । मोर….. कहीं उँच नीच बाटे भारत के भूमि कहीं त पहरुवा , गगनवा के चूमि चमके मोती अइसन ओसिया बेजोर मोर बलमा गइलें खेतवा……………. कन्हवा पर हर लेके हथवा कुदारी गते गते कोड़ दीहलें सागरी कियारी बनवा में नाचेला मोर चारी ओर मोर बलमा गइलें खेतवा……………. खेतवा मे लह लह लहके फसलिया पुरुवा के संगे संगे झूमेले बलिया देखि देखि बलमा भइलें विभोर मोर बलमा गइले खेतवा……………. देशवा के आन बान शान मोर किसान लाल बिहारी लाल…

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छठी माई सुन ली अरजिया हमार

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मंदिर में बानी लेले आरती के थाली , नदिया किनारे सूरुजमल के लाली , छठी माई के लीला अपरम्पार , करिहें पूरन , मनोकामना हमार ॥ छठी माई…………………………। केला क घवदवा आ गेहुं क मोटरिया , सुपवा सजवले बानी भरी ठिकरिया , सरधा से होई भरल परिवार  , रउरी किरपा बा बरत हमार ॥  छठी माई…………………………….। सांझे – भोरे करेम अदितमल के अरचन , उहे करेलन जन जीवन के सिरिजन  , दरसन दे देतु , माई एक बार करब हम नमन बारम्बार । छठी माई………………………….।   पूजा गुप्ता “नेपाल”

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लिखेनी गीत

guru

लिखे नी गीत पर,गावे ना आइल ! फजिहत मे जान परल, जी घबराइल !! गइनी स्कुल ना,नाव रहे लिखाइल! भइनी ना पास कबो, डिग्री बा आइल !! मास्टर जी कहे ले,गोबर बा घोराइल ! लिखेनी गीत पर,गावे ना आइल !! कइनी बरात बहुत,विआह ना भइल ! कहइनी ना पापा, पर लइका बा भइल !! कइनी छठीहार त, गाँव जुटी के खाइल ! लिखे नी गीत पर, गावे ना आइल !! खइनी बहुत दूध-घी,दही ना घोटाइल ! पिये लगनी दारू त, पेट बहरी आइल !! धइले बा रोग पर, मउवत  ना…

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बोलला में दोष बा

guru

मत बोल ए बाबू बोलला में दोष बा आजुकल के लइकन में नवा जोश बा ||   फरले बा मांग बिचे  ही चनियां पहिनेला बाली पहिनी नथुनिया बढ़वाले बाल मुड़ववले मोछ बा ||   करे ला श्रृंगार जस नाच के नचनिया साजन का बनी लागत बा  सजनियाँ घरवा में शेर बाहर पालतू खरगोस बा ||   घर के घोटाय ना खाला बजारू दूध दही अटकेला रोज पीये दारु चढ़वाले बा गांजा नशा में मदहोस  बा ||   शराफत से बा दूर जबान पर बा गारी बिगरल ढंग ढेवार , दुखी…

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गीत

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आइल रहस गांधी जी भारत में संत बन के उनके परिश्रम से मुक्ति मिलल गोरन से विगुल बाजल आजादी के सहर आ गांवे-गांव केतना देले कुरबानी भइल भारत में नाव अइसन महात्मा से अंगरेज भी डर गइले आइल रहस गांधी जी …………. केतना गो नर नारी, गांधी के साथे अइले क्रांति के मसाल के अहिंसा से जलइले सदी में जे ना भइल, बरिस में करी गइले आइल रहस गांधी जी …………. चौरा-चौरा के घटना चाहे हो दांडी मार्च लंदन में गोलमेज हो चाहे बिहार मार्च सबका हीरो गांधी जी देखत-देखत…

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दुश्मन कइले बावे खतरा……

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दुश्मन कइले बावे खतरा चल भतरा हाय चल भतरा दुश्मन कइले बावे खतरा ठांय-ठांय दागब गोली बंद करब उनकर बोली हमही  छोड़ाइब उनकर नखरा चल भतरा…….दुश्मन….. सीमा के पार जाके नख़ड़ा छोड़ाइब ना जे मनिहे त लबदा से मनाइब हमही  बनाइब कफन अंचरा चल भतरा…….दुश्मन….. हाथी के दाँत नियन  बात नाही करब नाही  मानी  बात त छाती मूंग दरब हम छोड़ाइब उनकर लफरा चल भतरा…….दुश्मन….. लाल बिहारी लाल के संगे पार जाइब सर्जिकल स्ट्राइक से छक्का छोड़ाइब होई ना माटी के अपने  बखरा चल भतरा…….दुश्मन…..   लाल बिहारी लाल

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